Blue brain technology in hindi

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आज वैज्ञानिक एक ऐसे कृत्रिम दिमाग को बनाने में लगे हुए है जो सोच सकता है, डिसीजन ले सकता है, रेस्पोंड कर सकता है और चीजे मेमोरी में स्टोर करके रख सकता है | इस ब्रेन का नाम ब्लू ब्रेन है और यह टेक्नोलॉजी ब्लू ब्रेन टेक्नोलॉजी कहलाती है | इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य “एक मनुष्य के दिमाग को कृत्रिम दिमाग में अपलोड करना है” ताकि मनुष्य की मृत्यु होने पर उसके मस्तिष्क में जो डेटा है वो सुरक्षित रहे और हमारे काम आ सके |
 
अब हम यह जानने की कोशिश करते है की किसी और मनुष्य के मस्तिष्क का डेटा हमारे किस काम आएगा | एक उदारहण लेकर समझते है | महान वैज्ञनिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन जिनकी मृत्यु हो चुकी है जो की एक बहुत ही दुखत घटना है | क्योंकि हम लोग उनके द्वारा होने वाले और भी नए अविष्कार से वंचित रह गये | उनकी इंटेलिजेंस और नोलेज भी उन्ही के साथ चली गई | मान के चलते है की यदि उनके दिमाग का डाटा हमारे पास होता तो उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी रिसर्च, इंटेलिजेंस और नोलेज हमारे बीच होती और हम उस डाटा को ब्लू ब्रेन में अपलोड करके प्रोसेस कर सकते है |
 
अर्थात् आज हमारे बीच अल्बर्ट आइन्स्टाइन एक कृतिम रूप में होते और नए नये अविष्कार कर रहे होते | अपितु मै तो यह कहूँगा की एस तरह कृत्रिम बुद्धि से की गई रिसर्च ज्यादा फ़ास्ट होती क्योंकि मशीन, मनुष्य से ज्यादा जल्दी से काम कर सकती है |
 
टेक्नोलॉजी आज तेज़ी से बढ़ रही है | इसके साथ ही एक जानी मानी कंपनी IBM और Switzerland’s Ecole Polytechnique Federale de Lausanne’s (EPFL) Brain and Mind Institute के वैज्ञानिक ब्लू ब्रेन को बनाने में लगे हुए है | इस ब्रेन को बनाने का काम रिवर्स इंजीनियरिंग के द्वारा किया जा रहा है | रिवर्स इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की वह शाखा है जिसमे किसी बनी हुई चीज को देखकर वैसी ही चीज बनाने की कोशिश की जाती है |




ब्लू ब्रेन में मनुष्य के ब्रेन को अपलोड करने के बाद उसके बायोलॉजिकल फॉर्म को एक वर्किंग 3D (त्रिविमीय) मॉडल के रूप में हाई स्पीड इलेक्ट्रो केमिकल इंटरेक्शन के द्वारा दर्शाया जायेगा | इस आउटपुट से उस व्यक्ति के cognitive functions जैसे उसकी भाषा, उसके सिखने का तरीका, उसके अनुमान लगाने का तरीका या यदि उसे कोई बीमारी है तो उसके बारे में भी जानकारी ली जा सकती है |
 
दरसल हम यह कह सकते है की ब्लू ब्रेन वह टेक्नोलॉजी है जिससे हम मशीन को सोचने की शक्ति दे सकते है | इस टेक्नोलॉजी के आने के बाद सोचने का काम भी मशीन करने लगेगी और हम इस काम से भी फ्री हो जायेंगे | है न यह एक कमाल की टेक्नोलॉजी | तो आपको पहले यह बता दे की इस टेक्नोलॉजी पर अभी काम चल रहा है और एक अनुमान के मुताबिक आने वाले 30 सालो  में यह टेक्नोलॉजी हमारे बीच में होगी और हम अपने आप को कम्प्यूटर में अपलोड कर पाएंगे |
ब्लू ब्रेन, ह्यूमन ब्रेन को और ज्यादा समझाने में भी हमारी मदद करेगा जिससे कई लाइलाज बीमारियों के समाधान को भी खोजा जा सकता है |
 
यह ब्रेन सुपर कम्प्यूटर “ब्लू जीन” की मदद से काम करेगा | जिसके द्वारा यह नेचुरल ब्रेन की तरह ही रियेक्ट कर सकता है और किसी भी व्यक्ति के ब्रेन का डाटा स्टोर रख पायेगा और उस व्यक्ति की तरह ही एक्ट कर पायेगा चाहे वह व्यक्ति मर भी क्यों न गया हो |
 
Blue Gene Super Computer
Blue Gene Super Computer which is used in blue brain

ब्लू ब्रेन का इतिहास

इस प्रोजेक्ट को ब्लू ब्रेन प्रोजेक्ट नाम दिया गया है | यह प्रोजेक्ट मई 2005 में Brain and Mind Institute of the Ecole Polytechnique Federale de Lausanne (EPFL), Switzerland ने IBM के साथ मिलकर शुरू किया | यह प्रोजेक्ट Neuroscientist Dr. Henry Markram के नेतृत्व में चल रहा है | जिसमे Blue Gene नामक सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया है जो की Michael Hines’s NEURON software पर चल रहा है | इसका 3D आउटपुट सिर्फ सिमुलेशन ही नही है बल्कि यह न्यूरोनस के बायोलॉजिकल फॉर्म का रिअलास्टिक 3D सिमुलेशन है |

इसकी प्रोग्रेस नीचे सारणी में बताई गई है –

Year Progress
2005 पहला सिंगल सेलुलर मॉडल बना
2007 प्रोजेक्ट का पहला फेस ख़तम हो गया जिसमे Neocortical column की रिसर्च, डाटा ड्रिवन प्रोसेस आदि काम संपन्न हुए
2008 पहला आर्टिफीशियल सेलुलर neocortical column बनकर तैयार हो गया जो की 10,000 सेल्स से मिलकर बना था |
2011 100 Neocortical columns को मिलाकर एक सेलुलर Mesocircuit बनाया गया |
2014 100 Mesocircuits को मिलाकर एक rat ब्रेन बनाया गया |
History of Blue brain



Uploading the brain

ब्लू ब्रेन को उपयोग में लेने से पहले हमें किसी मनुष्य के ब्रेन को इसमें अपलोड करना होगा | मतलब किसी व्यक्ति के ब्रेन का डेटा ब्लू ब्रेन में ट्रान्सफर करना होगा ताकि ब्लू ब्रेन उस व्यक्ति की तरह रियेक्ट कर सके | लेकिन इसके लिए पहले हमें उस व्यक्ति के ब्रेन को स्कैन करना होगा ताकि हम उसके ब्रेन से डाटा ले सके | यहाँ कांसेप्ट आता है नेनोबोट्स का | दरअसल ये बहुत ही छोटे रोबोट्स है जिन्हें उस व्यक्ति के शरीर में पहुचाया जाता है जिसके दिमाग का डेटा लेना है | शरीर में पहुचने के बाद ये बोट्स उस व्यक्ति के दिमाग को सावधानी से स्कैन करने लगते है और डाटा ब्लू ब्रेन को सेंड कर देते है |
 
Nanobots for uploading data into bluebrain
Nanobots for uploading data from human brain to blue brain

Need of Blue Brain | ब्लू ब्रेन की जरूरत

आज ब्लू ब्रेन बनाया जा रहा है ताकि हम मनुष्यों की  intelligence को सुरक्षित कर सके क्योंकि intelligence बने नही जा सकती है | यह तो सिर्फ जन्म के साथ आती है और मृत्यु के साथ चली जाती है | लेकिन हमारे समाज को  वह intelligence चाहिए ताकि हम जल्दी से तरक्की कर सके क्योंकि हर मनुष्य intelligent नही होता है | इसका समाधान ब्लू ब्रेन टेक्नोलॉजी में है |
हमें अक्सर चीजे याद रखने में दिक्कत होती है जैसे किसी व्यक्ति का नाम, दिनांक, words, sp,ellings, grammar हिस्ट्री आदि | आज की व्यस्त लाइफ में हर कोई इन चीजो से मुक्त होना चाहता है | इसलिए ब्लू ब्रेन एक असिस्टेंट की तरह हमारी हेल्प कर सकता है |

Natural Brain vs Blue Brain

Basis on Natural Brain Blue Brain
Input हमारे शरीर में सूचना के आदान-प्रदान के लिए neurons उत्तरदायी होते है | हमारा शरीर Sensory cells से इनपुट लेता है और electric impulses बनाता है जो की neurons द्वारा recieve किये जाते है और हमारे ब्रेन को भेज दिये जाते है | इस प्रक्रिया में artificial neurons का उपयोग किया जाता है जो की silicon चिप से बने हुए होते है | जो की sensory cells से input लेते है और इलेक्ट्रिक impulses की मदद से उस इनपुट को सुपर कंप्यूटर को भेज दिया जाता है |
Interpretation यह प्रोसेस अलग-अलग neurons की स्टेट के अनुसार होता है इस प्रोसेस में आर्टिफीसियल neurons का उपयोग किया जाता है जिसमे Interretation, registers की अलग-अलग स्टेट के अनुसार होता है |
Output Interpratatino के अनुसार मनुष्य का दिमाग कोशिकाओ को कोई कार्य करने हेतु सिग्नल भेजता है और हमारे शरीर का वह भाग रेस्पोंड करता है | इसी तरह registers की स्टेट के अनुसार ब्लू ब्रेन भी artificial neurons को सिग्नल भेजता है और 3D output दिखता है |
Memory हमारे दिमाग में कई सरे neurons होते है जो की अलग-अलग स्टेट्स को स्टोर करके रखते है | जब भी हमें कुछ याद करना होता है तब हम उन नयूरोंस की स्टेटस को interprete करते है | इस ब्रेन में डाटा Registers की अलग-अलग स्टेट्स के रूप में स्टोर रहता है |
Processing जब हम कुछ सोचते है तो दरअसल हम अपने दिमाग की neural circuitry में लॉजिकल और arithmetic गणना करते है साथ ही पुरानी मेमोरी और करंट सिचुएशन्स को भी ध्यान में रखते है | यहाँ पर भी यही काम होता है लेकिन यह सब (arithmetic and logical calculation) सुपर कम्प्यूटर में होता है |
Natural Brain vs Blue Brain

 

 

Advantages of Blue Brain | ब्लू ब्रेन के फायदे

  1. हम चीजो को बिना किसी मेहनत के याद रख पाएंगे |
  2. किसी व्यक्ति के अभाव में भी हम बड़े-बड़े फैसले ले सकते है |
  3. व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी हम उसकी intelligence का उपयोग कर सकते है |
  4. रोगों का इलाज आसानी से खोज पाएंगे |
  5. रिसर्च कार्य जल्दी से पुरे होने लगेंगे |
  6. एक ही व्यक्ति, एक ही समय में अलग – अलग कार्य कर सकता है |

Disadvantages of Blue Brain | ब्लू ब्रेन के नुकसान

  1. हम कम्प्यूटर पर बहुत ही ज्यादा निर्भर हो जायेंगे |
  2. कोई दूसरा व्यक्ति ब्लू ब्रेन की intelligence को हमारे खिलाफ भी उपयोग कर सकता है |
  3. कम्प्यूटर वायरस इसकी कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न कर सकता है |
  4. ह्युमंस की क्लोनिंग होना शुरू हो सकती है |

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